JAMSHEDPUR : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जमशेदपुर पहुंची, ओल चिकी लिपि के डेवलपमेंट की सराहना की, NIT के दीक्षांत समारोह में हुईं शामिल ।
जमशेदपुर, झारखंड ।राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू अपने झारखंड दौरे के पहले दिन सोमवार को जमशेदपुर पहुंची। यहां करनडीह स्थित दिशोम जाहेरथान में उन्होंने परंपरागत पूजा-अर्चना की। इसके बाद ओल चिकी लिपि के 100 साल पूरे होने के मौके पर आयोजित समापन समारोह में शामिल हुईं। इस दौरान उन्होंने ओल चिकी लिपि के डेवलपमेंट के यात्रा की सराहना की।
इसके बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जमशेदपुर के एक दिवसीय दौरे के दूसरे हिस्से में एनआईटी के 15वें दीक्षांत में शामिल हुईं। इस दौरान मुख्य अतिथि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित किया और फिर रांची के लिए रवाना हो गईं।
NIT में राष्ट्रपति द्वारा श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि महाराज को समाज व संस्कृति में योगदान के लिए डॉक्टर ऑफ लिटरेचर (डी-लिट) और आरएसबी समूह के संस्थापक रबींद्र कुमार बेहरा को उद्योग वराष्ट्र निर्माण के लिए डॉक्टर ऑफ फिलॉस्फी (पीएचडी) की मानद उपाधि प्रदान की गई। इस वर्ष कुल 612 स्टूडेंट्स ने अपनी सफलता का प्रमाण पत्र प्राप्त किया।राष्ट्रपति ने इस अवसर पर छात्रों को संबोधित किया। उन्होंने कहा-एनआईटी जैसे अग्रणी संस्थानों को रिसर्च और इनोवेशन पर और अधिक ध्यान देना चाहिए। आपके इस योगदान से भारत नॉलेज सुपर पावर के रूप में स्थापित हो सकेगा।
विकसित भारत का सपना केवल ऊंची इमारतों या शक्तिशाली अर्थव्यवस्था से पूरा नहीं होगा। बल्कि एक ऐसे समाज के निर्माण से यह सपना पूरा होगा, जिसमें अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को भी अवसर की समानता और गरिमापूर्ण जीवन जीने की सुविधा हो।उन्होंने कहा- आपकी शिक्षा और ज्ञान को तभी सफल माना जाएगा, जब उसका लाभ जन सामान्य तक पहुंचे। जब आप संवेदनशीलता के साथ तकनीकी कौशल का प्रयोग करेंगे तब आप इस लक्ष्य को प्राप्त करने में सफल होंगे।
राष्ट्रपति ने कहा- भविष्य में आपके सामने कई चुनौतियां आएगी, उस वक्त आपका चरित्रबल और नैतिक मूल्य ही आपके सबसे प्रभावी मार्ग दर्शक होंगे। मेरी आपको सलाह है कि सफलता को आप केवल बड़े पैकेज और ऊंचे पद से नहीं मापे। बल्कि इस आधार पर उसका आकलन करें कि आपके ज्ञान या कार्य से कितने लोगों के जीवन में साकारात्मक बदलाव आ रहा है।
वहीं, NIT में कार्यक्रम समाप्ति के बाद वापसी के क्रम में आकाशवाणी चौक के पास राष्ट्रपति ने अचानक अपनी गाड़ी रुकवाई और करीब आधा किलोमीटर तक पैदल चलकर सड़क किनारे खड़े लोगों का अभिवादन स्वीकार किया।
इस दौरान सुरक्षा एजेंसियों ने मोर्चा संभालते हुए आवश्यक सुरक्षा घेरा बनाए रखा। इस दौरान जनता ने भारत माता और बंदे भारत का नारा लगाया। राष्ट्रपति को अपने बीच पाकर लोग उत्साहित नजर आए। खासकर युवाओं में इस पल को लेकर खासा उत्साह देखा गया।
इससे पूर्व दिशोम जाहेरथान में अपने संबोधन के क्रम में उन्होंने संथाली भाषा में प्रार्थना के गीत भी गाए। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का पूरा संबोधन संथाली भाषा में रहा। कार्यक्रम में उन्होंने उन 12 लोगों को सम्मानित भी किया, जिन्होंने संथाली भाषा और ओल चिकी लिपि के उत्थान की दिशा में अतुलनीय काम किए हैं।
कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संथाली भाषा में प्रार्थना के गीत गाए। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने बताया कि अपनी प्रार्थना में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जेहार माता से अनुरोध किया है। उन्होंने अनुरोध किया कि हमें हमेशा उजाले वाले रास्ते पर ले चलना।
शामिल लोगों ने ही बताया कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उस प्रयास की सराहना की है, जिनकी बदौलत आज संथालियों की भाषा को पहचान मिल सकी है। उन्होंने कहा कि न केवल ओल चिकी लिपि बल्कि पंक्ति में पीछे रह रही दूसरी भाषाओं का भी समान विकास हो।
ओल चिकी लिपि के 100 साल पूरे होने के मौके पर आयोजित समापन समारोह में मौजूद राज्यपाल संतोष गंगवार और सीएम हेमंत सोरेन ने भी संबोधित किया।
राज्यपाल ने कहा लोक भवन के दरवाजे हर आम आदमी के लिए हमेशा खुला है। जहां बाद आदिवासियों के डेवलपमेंट की होगी, वहां लोक भवन हमेशा साथ देगा। वहीं सीएम हेमंत सोरेन ने भी लोगों को संबोधित कियाझारखंड के प्रख्यात आदिवासी नेता बाबा कार्तिक उरांव के बहाने भाजपा आदिवासियों को साधने में जुट गई है। पंखराज साहेब कार्तिक उरांव आदिवासी शक्ति स्वायत्तशासी विश्वविद्यालय निर्माण समिति (झारखंड-छत्तीसगढ़-ओडिशा) ने गुमला के रायडीह में 30 दिसंबर को अंतरराष्ट्रीय जन सांस्कृतिक समागम समारोह कार्तिक जतरा का आयोजन किया है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू इसमें मुख्य अतिथि के तौर पर शिरकत करेंगी। समिति के संयोजक व अध्यक्ष प्रदेश भाजपा के एसटी मोर्चा अध्यक्ष शिवशंकर उरांव ने कहा कि इस जतरा का उद्देश्य झारखंड-छत्तीसगढ़ और ओडिशा में सांस्कृतिक पुनरुद्धार, सुदृढ़ीकरण और शैक्षिक उत्थान को बढ़ावा देना है।
By Madhu Sinha





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