LATEHAR : संस्कृति से जुड़ने का माध्यम बना ‘धुमकुड़िया’ कार्यक्रम, विद्यालयों में सजा विरासत कॉर्नर।
लातेहार/महुआडांड़, झारखंड।
अपनी संस्कृति, परंपरा और विरासत से बच्चों को जोड़ने के उद्देश्य से महुआडांड़ और सोहरपाठ के विद्यालयों में दो दिवसीय ‘धुमकुड़िया’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। पिरामल फाउंडेशन के मार्गदर्शन में गांधी फेलोज़ ने कार्यक्रम का आयोजन किया।
महुआडांड़ स्थित झारखंड आवासीय बालिका विद्यालय में 17 सितंबर को कार्यक्रम के पहले दिन आदिवासी जीवन और संस्कृति पर आधारित डॉक्यूमेंट्री का प्रदर्शन किया गया। फिल्ममेकर बीजू टोप्पो ने बच्चों को अपनी फिल्मों के माध्यम से आदिवासी समाज की जीवनशैली और परंपराओं से परिचित कराया। बच्चों ने उत्साह के साथ सवाल पूछे और संवाद में भाग लिया।
वहीं, सोहरपाठ स्थित राज्यकृत उच्च विद्यालय में दूसरे दिन सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। बुजुर्गों और समुदाय के लोगों ने बच्चों को हल, मांदर, सुप, ढेंकी और पारंपरिक आभूषणों सहित विभिन्न सांस्कृतिक वस्तुओं की जानकारी दी।
कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण विद्यालय में बनाया गया ‘संस्कृति एवं विरासत कॉर्नर’ रहा। यहां पारंपरिक उपकरणों और वस्तुओं को प्रदर्शित किया गया। आयोजकों ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य बच्चों को अपनी जड़ों से जोड़ना और पारंपरिक ज्ञान को अगली पीढ़ी तक पहुंचाना है।
संदेश दिया गया— “हमारी संस्कृति हमारी पहचान और हमारी विरासत हमारी जिम्मेदारी है।”
Report By Ram Kumar ( Latehar, Jharkhand)
By Madhu Sinha


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