CHANDANKIYARI : स्वतंत्रता सेनानी, संविधान सभा के सदस्य देश भक्त पद्मश्री से अलंकृत डॉ. रत्नप्पा कुम्हार की जयंती व पुण्यतिथि पर राष्ट्रीय अवकाश घोषित करें: जगन्नाथ।
चंदनकियारी, बोकारो, झारखंड।चन्दनकियारी के आसनबनी, हटिया मैदान में डॉ. रत्नप्पा कुम्हार स्मारक समिति कि और से मंगलवार को संविधान सभा के सदस्य डॉ. रत्नप्पा कुम्हार की 117 वीं जन्म जयंती पर उनके चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी। अध्यक्षता बाउरी संघर्ष मोर्चा के केन्द्रीय सदस्य लक्ष्मण बाउरी ने किया. जबकि संचालन डॉ.रत्नप्पा कुम्हार स्मारक समिति के अध्यक्ष अंकित कुम्भकार ने किया। वहीं स्मारक समिति के संरक्षक सह किसान नेता व चन्दनकियारी विधानसभा के पुर्व प्रत्याशी जगन्नाथ रजवार ने कहा कि हम आजादी के 79 वें साल की दौर में गुजर रहे है। जहां देश में खेतों की किसान सड़कों पर है, छात्र नौजवान आन्दोलन पर तो कहीं भारतीय संविधान को बदलनें की कोशिशें लगातार जारी है। जिसे बचाने के लिए। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और संविधान निर्माण में डॉ आंबेडकर के साथ डॉ.रत्नप्पा कुम्हार की महत्वपूर्ण योगदान को जन जन पहुंचाने की संकल्प लेने की जरूरत है। श्री रजवार ने आगे कहा कि देश भक्त पद्मश्री डॉ.रत्नप्पा कुम्हार की जन्म 15 सितंबर 1909 को महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले के इचलकरंजी में हुई। तथा उनका निधन 23 दिसंबर 1998 को हुई. वे अपने जीवन में शिक्षा, सहकारिता तथा सामाजिक कुरीतियों को मिटाने में अभूतपूर्व योगदान दिया। डॉ रत्नप्पा ने देश की आजादी के लिए कई बार जेल गए। भारत छोड़ो आंदोलन में वे अग्रिणी भूमीका में हिस्सा लिए. जिसकी वजह से उन्हें 6 साल तक भूमिगत भी रहना पड़ा। देश की आजादी के बाद देश भक्त डॉ रत्नप्पा ने 24 जनवरी 1950 को बॉम्बे प्रांत से भारतीय संविधान सभा के सदस्य के रूप में शपथ ली और भारतीय संविधान के अंतिम मसौदे पर देश रत्न बाबा साहेब डॉ.भीमराव आंबेडकर के साथ हस्ताक्षर कर देश को सर्वोच्च विधान दिए। मांग किया कि उनके जन्म जयंती व पुण्यतिथि पर राष्ट्रीय अवकाश घोषित की जाय। मौके पर झारखण्ड आन्दोलनकारी नेता दुर्गा चरण महतो, बबलु कुम्भकार, अस्लम अंसारी, भैरव बाउरी, सागर कुम्भकार, बबलु कुम्भकार, मृत्युंजय कुम्भकार, करण कुम्भकार, प्रदीप गोस्वामी, बबलु गोस्वामी, प्रसंजीत कुम्भकार, कबीर अंसारी, फागु कुम्भकार, निताई कुम्भकार, प्रफुल्य कुम्भकार आदि शामिल रहे।
Report By Mahendra Mahato ( Chandankiyari, Bokaro, Jharkhand)
By Madhu Sinha

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