NEW DELHI/RANCHI : सोनम वांगचुक से तत्काल संवाद करे केंद्र सरकार, लोकतंत्र में संवाद ही सबसे बड़ी ताकत : पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय ।
नई दिल्ली/रांची।
पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय ने जंतर-मंतर पर पर्यावरणविद् एवं शिक्षाविद् सोनम वांगचुक के शांतिपूर्ण अनशन के 19वें दिन भी केंद्र सरकार की चुप्पी पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में किसी भी जनआंदोलन का समाधान संवाद से निकलता है, न कि चुप्पी या दमनात्मक रवैये से।
सुबोधकांत सहाय ने कहा कि आज देश एक ऐसे दौर से गुजर रहा है, जहाँ जनता की आवाज़ सुनना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। सोनम वांगचुक देश, समाज, शिक्षा, पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़े मुद्दों को लेकर शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रख रहे हैं। ऐसे में सरकार को उनसे तत्काल सार्थक वार्ता शुरू करनी चाहिए।
उन्होंने इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 1984 में लद्दाख के लोगों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर स्वर्गीय सोनम वांग्याल भूख हड़ताल पर बैठे थे। उस समय तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने आंदोलन के पाँचवें दिन ही संवाद का रास्ता अपनाया, उनकी बातें सुनीं और जूस पिलाकर उनका अनशन समाप्त कराया। यही लोकतांत्रिक परंपरा की असली पहचान थी।
सुबोधकांत सहाय ने कहा कि आज वही इतिहास एक गंभीर सवाल खड़ा कर रहा है। सोनम वांग्याल के पुत्र सोनम वांगचुक पिछले 19 दिनों से शांतिपूर्ण अनशन पर बैठे हैं, लेकिन अब तक सरकार की ओर से कोई सकारात्मक पहल या सार्थक बातचीत सामने नहीं आई है। लोकतंत्र में मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन संवाद से दूरी लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करती है।
उन्होंने कहा कि किसी भी नागरिक की असहमति को कानूनों के भय से दबाने की कोशिश उचित नहीं है। कानून का उद्देश्य न्याय सुनिश्चित करना है, न कि लोकतांत्रिक आवाज़ों को कुचलना। सरकार को चाहिए कि वह संवेदनशीलता दिखाते हुए बातचीत का रास्ता अपनाए और आंदोलनकारी पक्ष की बात गंभीरता से सुने।
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि लोकतंत्र की असली शक्ति सत्ता के प्रदर्शन में नहीं, बल्कि संवाद, सहमति और जनता के विश्वास को बनाए रखने में है। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि वह बिना किसी विलंब के सोनम वांगचुक से बातचीत शुरू करे और लोकतांत्रिक परंपराओं को मजबूत करने की दिशा में सकारात्मक पहल करे।
By Madhu Sinha

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