New Delhi :*वेदांता लिमिटेड ने लॉन्च की ‘विविध वर्स’- एक प्रीमियम पत्रिका, जहां भारत की अनेक दुनिया और विविध दृष्टिकोण एक साथ मिलते हैं*
• *एक प्रीमियम, संग्रहणीय द्विभाषी पत्रिका, जो पहली बार उभरते और आकांक्षी भारत की अनेक दुनियाओं को जोड़ते हुए विशेष स्टोरीटेलिंग अनुभव प्रस्तुत करती है।*
• *इसमें पंकज त्रिपाठी, अर्जुन राम मेजिहवाल, सोनल मानसिंह, मनु भाकर, राहुल गर्ग, फ़्लिपेराची सहित कई प्रमुख हस्तियों के विचार शामिल हैं, जो समकालीन भारत को नई दिशा दे रहे हैं।*
नई दिल्ली ।
वेदांता लिमिटेड ने आज ‘विविध वर्स’ का अनावरण किया। यह एक लिमिटेड एडिशन, कलेक्टिबल और प्रीमियम द्विभाषी पत्रिका है, जो पहली बार भारत की कहानी कहने की परंपरा को अनदेखी, अनसुनी और सावधानीपूर्वक चुनी गई कहानियों के माध्यम से प्रस्तुत करती है। इस पत्रिका में संस्कृति, सार्वजनिक नीति, उद्यमिता, एआई, खेल, जमीनी भारत और अन्य विषयों से जुड़ी विचारशील बातचीत और विशेष रूप से चुनी गई कहानियों को शामिल किया गया है।
तेजी से बदलती डिजिटल दुनिया के बीच ‘विविध वर्स’ प्रिंट माध्यम में एक ऐसा दुर्लभ ठहराव प्रस्तुत करता है, जहां विचार खुलकर सामने आते हैं, कहानियां प्रेरित करती हैं और भारत के विविध अनुभव व दृष्टिकोण एक साथ जुड़ते हैं। प्रिंट और डिजिटल दोनों रूपों में उपलब्ध इस विशेष और अनूठी स्टोरीटेलिंग कलेक्टिबल की हर कड़ी भारत के गांवों, कक्षाओं, फैक्ट्री परिसरों, स्टार्टअप्स और सांस्कृतिक दुनिया से जुड़ी आवाज़ों को एक साथ पिरोती है। यह एक ओर देश की सदियों पुरानी परंपराओं को दर्शाती है, तो दूसरी ओर आगे बढ़ते भारत की नई आकांक्षाओं को भी सामने लाती है। इसमें कलाकारों, उद्यमियों, नीति निर्माताओं, नवाचारकर्ताओं और बदलाव लाने वाले लोगों के विचार शामिल हैं, जो आधुनिक भारत को नई दिशा दे रहे हैं।
अपने फोरवर्ड संदेश में अनिल अग्रवाल, चेयरमैन, वेदांता ग्रुप ने कहा, “राष्ट्र निर्माण केवल बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर खड़े करने या अरबों डॉलर के व्यवसाय बनाने तक सीमित नहीं हो सकता। असल मायनों में यह अवसर पैदा करने, उद्योगों को बढ़ावा देने, महिलाओं को सशक्त बनाने और यह सुनिश्चित करने के बारे में है कि बच्चों को सही पोषण और शिक्षा मिले। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत की क्षमता पर विश्वास किया जाए और उसे एक मंच दिया जाए। ‘विविध वर्स’ इसी विश्वास से जन्मा है। यह विश्वास कि कहानियों में सोच बदलने और भविष्य को आकार देने की ताकत होती है।”
“यह पत्रिका उन करोड़ों भारतीयों को समर्पित है, जो अपनी मेहनत से देश को आगे बढ़ा रहे हैं। ऐसे समय में, जब अनिश्चितता और उम्मीद दोनों साथ मौजूद हैं, हमें शोर नहीं बल्कि स्पष्ट सोच की जरूरत है। यह पत्रिका उसी स्पष्टता की दिशा में एक कदम है,” इस पहल के पीछे अपनी सोच रखने वाले अनिल अग्रवाल ने आगे कहा।
सावधानीपूर्वक तैयार की गई और आकर्षक दृश्य प्रस्तुति से सजी ‘विविध वर्स’ की पहली कड़ी में पाठकों को प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों के विविध और अनूठे विचार पढ़ने को मिलेंगे।
कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने इस बात पर विचार साझा किए कि संविधान किस तरह आम नागरिकों को सशक्त बनाता है। उन्होंने कहा, “मेरी यात्रा केवल व्यक्तिगत प्रतिभा का परिणाम नहीं थी; यह इसलिए संभव हो सकी क्योंकि भारत के संविधान ने सभी के लिए समान अवसर सुनिश्चित किए।” पद्म विभूषण डॉ. सोनल मानसिंह ने भारत की जीवंत सभ्यतागत विरासत पर कहा, “भारतीय सभ्यता को संरक्षित करना केवल अतीत को याद रखना नहीं, बल्कि उसके मूल्यों को सजगता के साथ जीना है।”
प्रसिद्ध बॉलीवुड अभिनेता पंकज त्रिपाठी ने तेजी से बदलते सांस्कृतिक परिवेश में वास्तविकता और अनुभवों के महत्व पर कहा, “लाइक्स नहीं, लाइफ के अनुभव जरूरी हैँ।” खेल जगत से ओलंपिक पदक विजेता मनु भाकर ने अनुशासन और दृढ़ता पर कहा, “खेलों में उत्कृष्टता हासिल करना एक प्रक्रिया है, जिसे चुनौतियों के बावजूद लगातार समर्थन मिलना चाहिए।” उद्यमिता के क्षेत्र से स्टार्टअप से यूनिकॉर्न बनाने वाले राहुल गर्ग ने एक सीधा सवाल उठाते हुए कहा, “भारत की फैक्ट्रियां अब भी 1990 के दशक की तरह क्यों काम करें?”
संगीत और सांस्कृतिक नवाचार पर ‘धुरंधर’ फिल्म से जुड़े फ़्लिपेराची ने कहा, “अगर किसी दूसरी संस्कृति के लोग आपकी धुन से जुड़ते हैं, तो वह सबसे बड़ा सम्मान है।” वहीं लोकेश आनंद ने कहा, “युवा श्रोता पहली बार शादी-ब्याह से आगे शहनाई को सुन रहे हैं… यह मुझे बेहद खुशी देता है।” डीजे आउटलॉ ने कहा, “हमारा उद्देश्य ऐसा संगीत बनाना था, जिसे लोग सोचने से पहले महसूस करें।” ये सभी विचार आज के भारत की विविधता, ऊर्जा और महत्वाकांक्षा को दर्शाते हैं।
विचार नेतृत्व से आगे बढ़ते हुए, यह पत्रिका उभरते डिजिटल रुझानों, जमीनी स्तर की उद्यमिता, पारंपरिक स्वास्थ्य पद्धतियों, फूड फेस्टिवल्स और शिक्षा को नए रूप में बदलने में एआई की भूमिका जैसे विषयों की भी गहराई से पड़ताल करती है।
‘विविध वर्स’ को खास बनाने वाली एक और महत्वपूर्ण बात इसकी विशेष रूप से तैयार की गई एक्सक्लूसिव प्रस्तुति है। पत्रिका का हर संस्करण एक संग्रहणीय सांस्कृतिक कृति के रूप में तैयार किया गया है, जिसमें विशेष रूप से तैयार की गई सीमित संस्करण की फ्रेम की हुई कलाकृति भी शामिल होती है। यह पत्रिका को केवल पढ़ने की चीज़ नहीं, बल्कि संभालकर रखने, बार-बार देखने और लंबे समय तक संजोकर रखने योग्य बनाती है।
एक जनरल इंटरेस्ट पत्रिका के रूप में, ‘विविध वर्स’ खुद को संस्कृति, विचारों और समकालीन भारत के संगम पर स्थापित करती है। इसके आगामी संस्करणों में भी विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े ऐसे लोगों और बदलाव लाने वाले व्यक्तित्वों की कहानियां और विचार शामिल किए जाएंगे, जिनकी यात्राएं मिलकर भारत के बदलते सामाजिक और सांस्कृतिक परिदृश्य को दर्शाती हैं।
‘विविध वर्स’ के माध्यम से वेदांता लिमिटेड पाठकों को केवल पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि भारत की बदलती कहानी के उस विशेष हिस्से को अपने पास संजोकर रखने के लिए आमंत्रित करता है, जो भारत को अपनी अनेक विविधताओं और अनुभवों के कारण असाधारण बनाता है।
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अगर आपको विचारपूर्ण कहानियां, प्रेरणादायक यात्राएं और भारत के विभिन्न हिस्सों से चुने गए विशेष विचार पसंद हैं, तो हम आपको ‘विविध वर्स’ पत्रिका की निःशुल्क प्रति प्राप्त करने के लिए पर ईमेल - vividhverse@vedanta.co.in करने के लिए आमंत्रित करते हैं। आप आगामी संस्करणों के लिए अपने सुझाव और योगदान भी साझा कर सकते हैं। कृपया अपने ईमेल में अपना पूरा नाम, ईमेल आईडी, मोबाइल नंबर, पिन कोड सहित पूरा डाक पता, और यह जानकारी अवश्य दें कि क्या आप अपडेट्स, न्यूज़लेटर्स और विशेष ऑफर्स प्राप्त करना चाहते हैं।
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By Madhu Sinha


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