RAMGARH : माँ छिन्नमस्ता की जयंती का आयोजन आध्यात्मिक और सांस्कृतिक तरीके से धूमधाम से मनाया गया।

 RAMGARH : माँ छिन्नमस्ता की जयंती का आयोजन आध्यात्मिक और सांस्कृतिक तरीके से धूमधाम से मनाया गया। 


रामगढ़, झारखंड । 

रामगढ़ स्थित 'सिद्धपीठ रजरप्पा'  में माँ छिन्नमस्ता की जयंती का आयोजन धूमधाम से मनाया गया। माँ छिन्नमस्तिका की जयंती आध्यात्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण होता है।

30 अप्रैल 2026 यानी गुरुवार को वैशाख मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया (अक्षय तृतीया) के पावन अवसर पर माँ छिन्नमस्ता का प्राकट्य उत्सव धूमधाम से मनाया गया। यहाँ इस विशेष दिन और मंदिर से जुड़ी विस्तृत जानकारी दी गई है। 

मां छिन्नमस्तिका की दिव्य और जागृत प्रतिमा के दर्शन हो रहे हैं. मां का यह स्वरूप, जिसमें वे अपने कटे हुए सिर को हाथ में धारण किए हुए हैं, परम त्याग और आत्म-ज्ञान का प्रतीक माना जाता है. प्रतिमा पर चढ़े लाल गुड़हल के फूल और माला भक्तों की अगाध श्रद्धा को दर्शाते हैं.

जयंती के इस पावन अवसर पर मां के दर्शन मात्र से ही मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है.

 1. माँ छिन्नमस्ता का स्वरूप और महत्व

माँ छिन्नमस्ता को दसों महाविद्याओं में से एक माना जाता है। इनका स्वरूप त्याग और आत्मज्ञान का प्रतीक है।

*   **अद्वितीय प्रतिमा:** माँ अपने कटे हुए सिर को हाथ में धारण किए हुए हैं, और उनकी गर्दन से निकलने वाली रक्त की तीन धाराएँ उनकी सखियों (जया और विजया) और स्वयं को तृप्त कर रही हैं।

*   **तामसिक और सात्विक संगम:** यह मंदिर भैरवी और दामोदर नदी के संगम पर स्थित है, जिसे बेहद शक्तिशाली ऊर्जा केंद्र माना जाता है।

2. जयंती समारोह के मुख्य आकर्षण

जयंती के दिन रजरप्पा में विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं:

*   **महास्नान और श्रृंगार:** ब्रह्म मुहूर्त में माँ का पंचामृत स्नान कराया जाता है। इसके बाद माँ का विशेष भव्य श्रृंगार होता है, जिसमें फूलों और स्वर्ण आभूषणों का प्रयोग किया गया। 

*   **विशेष पूजा और हवन:** विश्व शांति और जन कल्याण के लिए विशेष महायज्ञ और हवन का आयोजन किया गया, जिसमें देश भर से साधु-संत और श्रद्धालुओ ने भाग लिया।

*   **महाभोग:** माँ को छप्पन भोग अर्पित किया गया है और उसके पश्चात भक्तों के बीच विशाल भंडारे का आयोजन  गया। 

3. रजरप्पा मंदिर की विशेषताएँ

यह मंदिर पौराणिक और ऐतिहासिक दोनों दृष्टिकोणों से खास है:

*   **शक्तिपीठ:** इसे असम के कामाख्या मंदिर के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा शक्तिपीठ माना जाता है।

*   **वास्तुकला:** मंदिर की बनावट प्राचीन है और इसके चारों ओर अन्य देवी-देवताओं (जैसे बजरंगबली, सूर्य देव और भगवान शिव) के भी मंदिर हैं।

*   **प्राकृतिक सुंदरता:** दामोदर और भैरवी नदियों का संगम इस स्थान की आध्यात्मिक जीवंतता को और बढ़ा देता है।

4. श्रद्धालुओं के लिए विशेष जानकारी

 **स्थान**  रजरप्पा, जिला रामगढ़, झारखंड |

**तिथि (2026)**  30 अप्रैल (अक्षय तृतीया के दिन) 

**प्रमुख नदियाँ**  दामोदर और भैरवी 

 **निकटतम रेलवे स्टेशन**  रामगढ़ कैंट या बरकाकाना जंक्शन 





By Madhu Sinha

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