RANCHI,JHARKHAND#झारखंड के छह शहरों की वायु प्रदूषण से संबंधित एमिशन इन्वेंटरी रिपोर्ट जारी की गयी.!
जेएसपीसीबी, सीड और सी-स्टेप ने वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए सभी स्टेकहोल्डर्स की साझा पहल पर दिया जोर .!
झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (जेएसपीसीबी), सेंटर फॉर एनवायरनमेंट एंड एनर्जी डेवलपमेंट (सीड) और सेंटर फॉर स्टडी ऑफ़ साइंस, टेक्नोलॉजी एंड पॉलिसी (सी-स्टेप) द्वारा संयुक्त रूप से झारखंड के छह शहरों की वायु प्रदूषण स्थिति से संबंधित एमिशन इन्वेंट्री रिपोर्ट (प्रदूषण उत्सर्जन सूची) जारी की गयी। यह रिपोर्ट रामगढ़, हजारीबाग, साहिबगंज, दुमका, पाकुड़ और चाईबासा में प्रदूषण फैलाने वाले स्रोत एवं कारकों को दर्शाती है। इस रिपोर्ट में एयर पोल्युशन के लिए घरेलू, व्यावसायिक, इंडस्ट्री, निर्माण गतिविधियों, खुले में जलावन, और सड़क की धूल आदि विभिन्न कारकों एवं क्षेत्रों का अध्ययन किया गया है। प्रदूषण उत्सर्जन स्रोतों को सिलसिलेवार ढंग से प्रस्तुत करनेवाली एमिशन इन्वेंट्री विभिन्न क्षेत्रों के उत्सर्जन अधिभार (एमिशन लोड) के साथ उनके भौगोलिक फैलाव से जुड़े अध्ययन के जरिए शहरों और राज्य को वायु प्रदूषण कम करने के लिए क्षेत्रीय स्तर पर रणनीति तैयार करने में मदद करती है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री संजय श्रीवास्तव, असिस्टेंट साइंटिफिक ऑफिसर, जेएसपीसीबी ने कहा कि 'राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक मुद्दे के रूप में वायु प्रदूषण को कम करने को प्राथमिकता दी है। नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम के अनुसार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा तीन शहरों (राँची, जमशेदपुर और धनबाद) के लिए क्लीन एयर एक्शन प्लान तैयार किया गया है और इन्हें लागू किया जा रहा है। झारखंड सरकार बड़ा कदम उठाते हुए दूसरे एवं तीसरे श्रेणी के शहरों को लक्षित करते हुए 6 शहरों (रामगढ़, हजारीबाग, चाईबासा, साहिबगंज, पाकुड़ और दुमका) में भी एक्शन प्लान बना रही है। यह एमिशन इन्वेंटरी रिपोर्ट इन शहरों में स्वच्छ वायु कार्य योजना बनाने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है और इसके जरिए चिन्हित स्रोतों के अनुसार बोर्ड ठोस उपाय उठा रहा है।'रिपोर्ट की मुख्य बातों को विस्तार से बताते हुए सी-स्टेप, बेंगलुरु में सीनियर रिसर्च साइंटिस्ट डॉ प्रतिमा सिंह ने कहा कि ‘विभिन्न प्रदूषकों से पड़ रहे वायु गुणवत्ता स्तर को समझना किसी भी शहर की कार्य योजनाओं के लिहाज से महत्वपूर्ण है। इसलिए एमिशन इन्वेंटरी और सोर्स अपोरशंमेंट स्टडी (स्रोत प्रभाजन अध्ययन) करने से स्थानीय स्तर पर प्रदूषकों के स्रोत एवं उनके हिस्से का अनुमान लगाने में मदद मिलेगी। झारखंड सरकार द्वारा छह शहरों में वायु प्रदूषण के स्तर को समझने के लिए बनी एमिशन इन्वेंटरी रिपोर्ट एक ठोस कदम है ताकि वायु प्रदूषण की चुनौतियों पर काम कर किया जा सके। एक औद्योगिक राज्य होने के नाते स्वच्छ हवा प्रदान करने के लिए राज्य सरकार की अपने नागरिकों के प्रति बहुत बड़ी जिम्मेदारी है।’इस रिपोर्ट के अनुसार पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) का उत्सर्जन रामगढ़ में सबसे अधिक पाया गया और इसके बाद हजारीबाग, पाकुड़, साहिबगंज, चाईबासा और दुमका का स्थान आता है। हालांकि रामगढ़ की आबादी साहिबगंज और हजारीबाग की तुलना में कम है, लेकिन शहर के अंदर और आस-पास बड़ी संख्या में भारी उद्योगों की उपस्थिति को एयरशेड में ज़्यादा हाई पार्टिकुलेट मैटर उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार पाया गया। दुमका, चाईबासा और हजारीबाग में पीएम 2.5 एमिशन के लिए परिवहन मुख्य रूप से ज़िम्मेदार है। साहिबगंज और पाकुड़ में पीएम 2.5 एमिशन का कारण घरेलू क्षेत्र रहा, जबकि रामगढ़ शहर में वायु प्रदूषण में सबसे बड़ी भूमिका उद्योग क्षेत्र की पाई गई।इस विषय पर डॉ मनीष कुमार (डायरेक्टर, रिसर्च एंड डेवलपमेंट, सीड) ने विभिन्न क्लाइमेट और हेल्थ एक्सपोज़र मॉडल के परिणामों के अलावा वायु गुणवत्ता प्रबंधन में सटीक एमिशन इन्वेंटरी की भूमिका पर चर्चा की। उन्होंने मौजूदा बॉटम-अप एमिशन इन्वेंटरी में अनिश्चितताओं की संभावनाओं के बारे में बताया कि भौगोलिक स्तर पर एमिशन फ़ैक्टर्स के अलावा घरेलू, परिवहन और खुले में कचरा जलाने वाले क्षेत्रों से सटीक डाटा संकलित करने से राज्य में वायु प्रदूषण के उत्सर्जन के अनुमानों में सुधार करने में मदद मिलेगी। उन्होंने आगे कहा कि सीड हमेशा डाटा और साइंस के माध्यम से बेहतर नीति-निर्माण के लिए सरकारी एजेंसियों को सहायता प्रदान करने और स्वच्छ हवा पर सभी स्टेकहोल्डर्स के बीच जागरूकता पैदा करने के लिए प्रतिबद्ध है।इस कांफ्रेंस को श्री अरूप नंदी (चीफ ऑफ़ रिसर्च, सी-स्टेप), श्री नवनीत कुमार, (स्टेट अर्बन डेवलपमेंट एजेंसी), उदय कुमार (सीनियर एसोसिएट, सीस्टेप) सहित अन्य लोगों ने भी संबोधित किया। तकनीकी सत्र में डॉ आत्रि गंगोपाध्याय (पल्मोनोलॉजिस्ट), श्री अनिर्बान बनर्जी (सी-स्टेप), श्री उत्सव कश्यप (टाटा स्टील), डॉ अनिल कुमार (एनआईएएमटी, रांची), डॉ भास्कर सिंह (सीयूजे, झारखंड) ने भागीदारी की। निष्कर्ष के रूप में पोल्युशन हॉटस्पॉट्स की पहचान और उन्हें रोकने के स्थानीय समाधान, उच्च प्रदूषण दिनों पर जनता की शिक्षा देने की रणनीतियों जैसी कई प्रमुख बिंदु सामने आये। इस कार्यक्रम में प्रमुख सिविल सोसाइटी संगठनों, शैक्षणिक संस्थानों, डॉक्टरों, रिसर्च थिंक-टैंक और नागरिक समूहों के प्रमुख प्रतिनिधियों ने भाग लिया।Report By Sourav Ray (Ranchi, Jharkhand)
By Madhu Sinha






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