CHANDANKIYARI : चन्दनकियारी के उराॅंवडीह में 171 वीं हूल दिवस पर दी गई श्रद्धांजलि
चन्दनकियारी, बोकारो, झारखंड ।
ब्रिटिश शासन- शोषण विरोधी महान स्वतंत्रता सेनानी सिद्धो कान्हू की 171 वीं शहादत पर मंगलवार को चन्दनकियारी के उराॅंवडीह में उनके चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी। अध्यक्षता ऑल इंडिया किसान खेत मजदूर के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रामलाल महतो ने किया जबकि संचालन कुसुमकियारी पंचायत के पंचायत समिति सदस्या नुनी वाला उरांव ने की। वहीं ऑल इंडिया किसान खेत मजदूर संगठन के राज्य सचिव कुमुद महतो ने शहीद सिध्दो कान्हू की चित्र पर माल्यार्पण कर नमन करने के उपरांत कहा कि शहिदों की गले पर फांसी का दबाव जितना बढ़ता गया। उनके इरादे उतने ही मजबूत होते गया. न चेहरे पर मौत का खौफ और न कोई शिकन। उनकी आंखों में चमक थी और सीना फख्र से चौड़ा। उन्हें खुशी थी कि वे वीरों सी वीरगति पाकर अमर हो रहे थे। यह कहानी 1855 ई. के संथाल हूल विद्रोह के नायक सिदो-कान्हू नाम के दो भाइयों की, जिन्होंने अंग्रेज सत्ता पोषित साहूकारी व्यवस्था के खिलाफ हथियार उठाकर उनका मुंहतोड़ जवाब दिया। साथ ही हसंते-हंसते अपनी मिट्टी के लिए मौत को गले लगा दिया।
वहीं किसान नेता जगन्नाथ रजवार ने कहा कि सिदो-कान्हू, चांद-भैरव अंग्रेजों के खून से शौर्य गाथा लिखने वाले नायक हैं। इन चारों भाइयों ने संथाल विद्रोह में सक्रिय भूमिका निभाई थी। इन लोगों ने 1855-56 में ब्रिटिश सत्ता, साहूकारों, व्यापारियों और जमींदारों के अत्याचारों के खिलाफ एक विद्रोह या हूल आंदोलन की शुरुआत की, जिसे हूल आंदोलन के नाम से जाना गया। संताल विद्रोह का नारा था करो या मरो-अंग्रेजों हमारी माटी छोड़ो। भारी विद्रोह के बाद दो भाइयों को सिध्दो-कान्हू गिरफ्तार कर लिया गया और उन्हें पेड़ पर लटकाकर फांसी दे दी गई. जिन आदिवासियों ने अंग्रेजों के खिलाफ अपने पारंपरिक हथियार के दम पर क्रांति का बिगुल फूंककर अंग्रेजों को आदिवासी हित में एसपीटी एक्ट का कानून पास करने के लिए बाध्य कर दिया. संताल हूल के नायक भाइयों की तरह फूलो मुर्मू और झानो मुर्मू ने भी कंधे से कंधा मिलकर जान की बाजी लगा दी थी। फूलो-झानो की परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए। महिलाओं के मुद्दों को लेकर एक और हूल की जरूरत है। हूल दिवस से आज भी झारखंडियों को अन्याय से लड़ने की प्रेरणा देता है। मौके पर मुस्लिम अंसारी, अंकित कुम्भकार, वैष्टम उरांव, मालती देवी, सोना देवी, शान्तो देवी, लक्ष्मी देवी, लक्ष्मी कुमारी, अष्टमी कुमारी, रुबी कुमारी, सावित्री देवी, मालती देवी, राम किशन उरांव, नारायण उरांव, भागीरथ उरांव, अष्टमी देवी,सोनु उरांव, मालती उरांव, मनोज उरांव, पाना लाल उरांव, सावित्री उरांव आदि शामिल रहे।
Report By Mahendra Mahato (Chandankiyari, Bokaro, Jharkhand)
By Madhu Sinha

0 टिप्पणियाँ